Wednesday, December 12, 2018

कितना वज़न होता है इनमें?

क्या एससी-एसटी एक्ट में संशोधन ने हिंदी पट्टी के सवर्णों को बीजेपी से दूर किया है?
और सबसे अहम सवाल तो ये है कि बीजेपी के लिए सबसे ज़्यादा वोट जुटाने वाले नरेंद्र मोदी की चमक फीकी पड़ रही है?
ग़ैर-एनडीए विपक्ष के पास अब इस बात पर आश्वस्त होने की पर्याप्त वजहें हैं कि 17वीं लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ताक़त कमतर होगी.
मोदी के ख़िलाफ़ एक कामयाब महागठबंधन के लिए ज़रूरी है कि कांग्रेस और यू
ऑस्ट्रेलिया के कप्तान टिम पेन का कहना है कि नए मैदान में भारतीय टीम का सामना बेहद तेज़ पिच से होगा. पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पॉन्टिंग भी पेन से सहमत दिख रहे हैं. उन्होंने कहा, ''मुझे लगता है कि पर्थ टीम इंडिया के मुक़ाबले हमारे खिलाड़ियों की ज़्यादा मदद करेगी.''
कंगारू टीम की तरफ़ से तेज़ गेंदबाज़ी की ज़िम्मेदारी मिशेल स्टार्क, जॉश हेज़लवुड, पैट कमिंस संभालेंगे. लेकिन भारतीय टीम भी ख़ाली हाथ नहीं है. टीम के पास अब ईशांत, बुमराह, मोहम्मद शामी और उमेश यादव/भुवनेश्वर कुमार जैसे गेंदबाज़ हैं. ऐसे में मुक़ाबला दिलचस्प होगा.
ये मैच इसलिए भी ख़ास है क्योंकि ऑप्टस मैदान में ड्रॉप-इन पिच है. लेकिन ये कौन सी पिच होती है और ड्रॉप-इन का मतलब क्या होता है?
ये ऐसी पिच होती है, जिसे मैदान या वेन्यू से दूर कहीं बनाया जाता है और बाद में स्टेडियम में लाकर बिछा दिया जाता है. इससे एक ही मैदान को कई अलग-अलग तरह के खेलों में इस्तेमाल किया जा सकता है.
सबसे पहले पर्थ  के क्यूरेटर जॉन मैले ने वर्ल्ड सिरीज़ क्रिकेट के मैचों के लिए ड्रॉप-इन पिचें बनाई थीं, जो साल 1970 के दशक में ऑस्ट्रेलियाई कारोबारी केरी पैकर ने आयोजित कराई थी.
पी, बिहार, बंगाल, आंध्रा, तमिलनाडु जैसे राज्यों के ग़ैर-एनडीए क्षत्रपों के बीच सही संतुलन बने.
लेकिन मोदी विरोधी महत्वाकांक्षी राजनेता सही तालमेल और समझदारी की राजनीति करने में नाकाम साबित हुए हैं जिससे संसदीय चुनावों में मोदी को सत्ता से बेदख़ल किया जा सके.
जो लोग टेस्ट क्रिकेट पसंद करते हैं, वो जानते हैं कि ऑस्ट्रेलिया में मुक़ाबला हो और मैच  पर्थ में खेला जा रहा हो, तो इसका क्या मतलब होता है. यहां मैच होने का मतलब है तेज़ गेंदबाज़ों की चांदी और बल्लेबाज़ों के लिए तेज़ रफ़्तार लाल गेंद वाली आफ़त.
एडिलेड टेस्ट में जीतने वाली भारतीय टी
इस सिरीज़ में ये पिच इसलिए अहम थीं क्योंकि उसका ज़्यादातर क्रिकेट डुअल पर्पज़ वेन्यू, यानी ऐसे जगह खेला गया, जहां एक से ज़्यादा खेल हो सकते थे. इसकी वजह ये थी कि टूर्नामेंट के मैच क्रिकेट के प्रभुत्व वाले इलाक़े से बाहर हुए थे.
सफ़ेद बॉल, फ़्लडलाइट, हेल्मेट और रंगीन जर्सियों के अलावा ड्रॉप-इन पिचों को क्रिकेट मैचों को और दिलचस्प बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया था.
जानकारों का कहना है कि इन पिचों पर जब पांच दिन वाला मैच खेला जाता है तो शुरुआती दो दिन असामान्य उछाल की वजह से तेज़ गेंदबाज़ और फिरकी, दोनों को मदद मिलती है, जबकि उसके बाद बल्लेबाज़ को भी पर्याप्त मौक़ा मिलता है.
एसएक्रिकेट के मुताबिक़ ड्रॉप-इन पिचों के साथ ख़ास बात ये है कि चाहने पर इन्हें मैच शुरू होने से महज़ 24 घंटे पहले फ़िट किया जा सकता है, और मैच ख़त्म होने की कुछ ही देर बाद हटाया जा सकता है. हालांकि, मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड के क्यरेटर ऑफ़-सीज़न होने पर इन पिचों को हटाकर रखना ज़्यादा पसंद करते हैं.
म को दूसरा टेस्ट मैच पर्थ में खेलना है, लेकिन इस बार मैदान नया है. 14 दिसंबर से शुरू हो रहा है दूसरा मुक़ाबला पर्थ शहर के ऑप्टस स्टेडियम में खेला जाएगा. शहर की स्वान नदी के एक तरफ़  पर्थ मैदान है और दूसरी तरफ़ ऑप्टस.
पहला टेस्ट होने की वजह से मेज़बान या मेहमान, दोनों ही टीमों को नहीं पता कि पिच क्या रंग दिखाएगी. लेकिन सभी का अंदाज़ा है कि मौसम और माहौल के हिसाब से अतीत में जिस तरह पर्थ की पिच तेज़ गेंदबाज़ों की मदद करती रही, इस बार भी वही होगा.

Wednesday, November 28, 2018

المرشحة الحائزة على المركز الثالث في خامسة العاصمة.. دنيا فخراوي

  أعلنت المرشحة بالانتخابات النيابية عن الدائرة الخامسة بمحافظة العاصمة «دنيا فخراوي» كامل تأييدها ودعمها للمرشح النيابي السيد أحمد صباح السلوم، وحلت فخراوي ضيفة على مقر المرشح السلوم بالسلمانية وقالت إن برنامجها يصب في نفس الاتجاه والمسار الخاص بالسلوم وهو خدمة الناس والتركيز على فئات الشباب والمرأة والمتقاعدين، وخدمة الوطن بشكل أشمل وأعم.. وكانت فخراوي قد حلت في المرتبة الثالثة بالجولة الأولى من الانتخابات الحالية التي جرت يوم السبت الماضي وحصلت على 376 صوتا وتتمتع بثقل كبير في بعض المناطق داخل الدائرة.
وقالت فخراوي: «سأقف يوم السبت القادم في جولة الإعادة من الثامنة صباحا دعما للسلوم وسأسخر كل طاقتي لدعمه لأنه صاحب برنامج حقيقي ويسعى لخدمة الدائرة فعليا، أهدافنا مشتركنا، برنامجنا وطني يسعى لخدمة الناس، واتفقنا على خدمة البحرين وشعب البحرين، وأتمنى له كل التوفيق والنجاح في الجولة القادمة».
من جانبه أكد المرشح النيابي أحمد صباح السلوم أمام حشد من أنصاره في مقره الانتخابي بالسلمانية أن المنافسة مع المرشحة دنيا فخراوي كانت «منافسة نزيهة ومحترمة» ولم تلجأ إلى أي أساليب رخيصة في دعايتها، حتى شعر الجميع بأنها لم تكن منافسة انتخابية بقدر ما كانت صداقة بين أهل وجيران، اعتادوا على أخلاقيات البحرين التي توارثناها جيلا بعد جيل، ومحبة للوطن يتبارى فيها الجميع لخدمة الناس بشرف ونزاهة.
وتابع السلوم قائلا: «كل مؤيدي فخراوي هم أهلي وجيراني في الأول والأخير، وكل الوعود التي قطعتها لمؤيديها ستكون في رقبتي، لأنها صاحبة برنامج واقعي وعملي وكان هدفها خدمة الناس أيضا، وسأخدم الجميع حبا في أهل البحرين وفي وطني البحرين، إن شاء الله لن نفرق بين أهالي الدائرة بل سنعمل على خدمة الجميع بكل ما استطعنا من جهد وعمل مثابرة بما لا يخالف القانون والشرع والتقاليد التي تربينا عليها في ديرتنا».
وأكد السلوم أنه تم الاتفاق مع المرشحة المحترمة دنيا فخراوي بالفعل على العمل سويا في المرحلة القادمة حال وصولي للمجلس إن شاء الله، وقد أبدت كل التفهم والتعاون في هذا الصدد، بل في الحقيقة هي من بادرت أيضا بإبداء رغبة في خدمة الناس بشكل تطوعي ودون النظر إلى أي امتيازات.. وهذا ما نتمناه من الجميع وبابنا مفتوح للتعاون مع كل أبناء الدائرة بل كل أبناء البحرين، فهذه مباراة في حب البحرين ولن يخسر أحد إن شاء الله بل كلنا فائزون.
وردا على أسئلة الحضور وتعليقاتهم بأن بعض النواب يختفون بعد وصولهم إلى البرلمان، ويغلقون هواتفهم في وجه المواطنين ويتبرأون من وعودهم الانتخابية.. قال السلوم «إنه ليس بالشخص الذي سيتوارى خلف مكتبه وموظفيه بعد نجاحه، ولن تحتاجوا للاتصال بي والتوسل إلى الموظفين للحصول على موعد للقائكم، لأنني سأكون بينكم ومعكم، وخدماتكم إن شاء الله ستصل إليكم قبل أن تطلبوها فلن تضطروا إلى طلبها أو التوسل لأحد، وحاشا لله أن نترككم تتوسلون لأحد غير الله، أما الواجبات الاجتماعية والتواصل مع الناس فهذه تربينا عليها منذ كنا صغارا وشبابا، ونفعلها دون الحاجة لأن نكون نوابا أو في أي منصب، بل نفعلها قربى لله واحتراما لأواصر الجيرة وعلاقات الأهل».
وردا على تعليقات أخرى حول مستوى الخدمات الصحية والتعليمية وملف الوظائف.. قال السلوم «لن نتأخر عن خدمة أي مواطن طالما في استطاعتنا مساعدته وتقديم يد العون له، ولكن نحن سنعتمد أساليب منهجية علمية في تنفيذ برنامج العمل الانتخابي الذي يبدأ بحصر بيانات أهالي الدائرة (أعمارهم ومؤهلاتهم ونوعهم)، ومن ثم مطالبهم واحتياجاتهم، ثم عمل خطة عمل مفصلة لتلبية هذه المطالب بالتعاون مع القطاع الخاص والحكومة، ومتابعة التنفيذ بعد ذلك من خلال استخدام الأدوات النيابية.

Monday, November 12, 2018

इस टर्मिनल से होगी बड़े जहाजों की आवाजाही और अब दिल्ली की होगी ऐसे हिफाजत

खुशखबर’ में सबसे पहली देश के लिए दो बड़ी खुशबरी है जो पीएम मोदी देने जा रहे हैं। एक तो ये कि देश को उसका पहला मल्टी मॉडल टर्मिनल मिल गया और दूसरा ये कि पानी में इतिहास रचा गया है। साथ ही अच्छी खबर दिल्ली वालों के लिए भी है क्योंकि अब दिल्ली सुरक्षित बनने वाली है। इसके अलावा देशभर में पेट्रोल और डीजल के दामों में लगातार गिरावट से आम आदमी को राहत मिल रही है।
पीएम मोदी ने दी बड़ी सौगात, देश के पहले मल्टी मॉडल टर्मिनल का उद्घाटन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी को 2413 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की सौगात दी। इन कई सौगातों में जल मार्ग विकास परियोजना के तहत बना मल्टीमॉडल टर्मिनल भी शामिल है । बता दें कि इस टर्मिनल को हल्दिया-वाराणसी के बीच राष्ट्री य जलमार्ग-1 पर विकसित किया जा रहा है. इस टर्मिनल के जरिए 1500 से 2000 टन के बड़े जहाजों की भी आवाजाही मुमकिन हो सकेगी।

पानी में रचा गया इतिहास, गंगा के रास्ते बंगाल से वाराणसी पहुंचा पोत

इसी के साथ एक अच्छी खबर ये भी है कि गंगा नदी में बंगाल से वाराणसी तक पोत का परिचालन शुरू हो गया है।आजाद भारत में पहली बार गंगा के रास्ते एक कंटेनर कोलकाता से वाराणसी पहुंच गया है।पेप्सिको कंपनी गंगा नदी के रास्ते जलपोत एमवी आरएन टैगोर के जरिए अपने 16कंटेनर को कोलकाता से वाराणसी लेकर आई। इसे सरकार की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।इनलैंड वाटर हाइवे-1 पर दो जहाजों के माध्यम से ये कंटेनर आए , जिन्हें 30 अक्टूबर को कोलकाता से रवाना किया गया था। ये जलपोत एमवी आरएन टैगोर वाराणसी से इफ्को कंपनी का उर्वरक लेकर वापस कोलकाता लौटेंगे।दिल्ली को सुरक्षित बनाने के ले सरकार एक अच्छा कदम उठाने जा रही है। दिल्ली सरकार पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शहर में 300 सीसीटीवी कैमरे लगवाने वाली है। जानकारी के मुताबिक अगले कुछ दिनों में राजधानी के तीन-चार विधानसभा क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लग जाएंगे। इन कैमरों में इंफ्रारेड और डे/नाइट विज

देशभर में पेट्रोल और डीजल के दामों में लगातार गिरावट से आम आदमी को राहत मिल रही है। सोमवार को पेट्रोल के दामों में 17 पैसे और डीजल के दामों में 15 पैसे प्रति लीटर की कमी दर्ज की गई है। नई कीमतें लागू होने के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 77.56 रुपये प्रति लीटर हो गया। वहीं डीजल 72.31 रुपए प्रति लीटर मिल रहा है।बता दें कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत लगातार घट रही है। इस वजह से देश में तेल सस्ता हो रहा है। इससे पहले लगातार कई दिनों तक तेल की कीमतों में इजाफा हुआ था।
न की भी सुविधा होगी। इसका लाइव फीड मॉनीटर किया जाएगा और रिकॉर्ड कम से कम एक महीने तक सुरक्षित रखा जाएगा।इन कैमरों को उन जगहों पर ज्यादा लगाया जाएगा जहां खासकर महिलाओं की आवाजाही ज्यादा होती है।दिल्ली को सुरक्षित बनाने के ले सरकार एक अच्छा कदम उठाने जा रही है। दिल्ली सरकार पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शहर में 300 सीसीटीवी कैमरे लगवाने वाली है। जानकारी के मुताबिक अगले कुछ दिनों में राजधानी के तीन-चार विधानसभा क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लग जाएंगे। इन कैमरों में इंफ्रारेड और डे/नाइट विजन की भी सुविधा होगी। इसका लाइव फीड मॉनीटर किया जाएगा और रिकॉर्ड कम से कम एक महीने तक सुरक्षित रखा जाएगा।इन कैमरों को उन जगहों पर ज्यादा लगाया जाएगा जहां खासकर महिलाओं की आवाजाही ज्यादा होती है।

Wednesday, October 10, 2018

दक्षिण अफ्रीका में एक भारतीय का वहां के नागरिक से शादी करना कितना मुश्किल

दक्षिण अफ्रीका के डरबन में भारतीय मूल की महिला ईलेन और काली नस्ल के उनके पति सीमो अपने तीन बच्चों और दो पालतू कुत्तों के साथ एक सुखी जीवन जी रहे हैं.
दो अलग नस्लों की यह जोड़ी आज खुश है, लेकिन इनका 14 साल का संयुक्त सफ़र कठिनाइयों से भरा रहा है. वजह थी नस्ली भेदभाव.
सीमो, जिनका संबंध दक्षिण अफ़्रीका के सबसे शक्तिशाली क़बीले जुलु से है, शर्माते हुए कहते हैं कि पहले उन्हें ईलेन से इश्क़ हुआ.
ईलेन को ये जानकर अच्छा लगा, लेकिन उन्होंने फ़ौरन अपने प्यार का इज़हार नहीं किया. ईलेन ने कहा, "मैंने कुछ समय के बाद महसूस किया कि मुझे भी सीमो से प्यार है. मैं उनसे उस समय बहुत प्यार करने लगी जब वो मुझे अपने गाँव लेकर गए."
कई देशों में दो अलग-अलग संस्कृति, नस्ल और मज़हब के लोग आपस में शादियां करते हैं, तो दो अलग नस्लों वाली ईलेन और सीमो की जोड़ी को परेशानियों का सामना क्यों करना पड़ा?
अगर आप दक्षिण अफ़्रीका के संदर्भ में देखें तो ये अनहोनी थी और आज भी है. क्षिण अफ़्रीका में रंगभेद करने वाली गोरी नस्ल की हुकूमत के दौर में काली और गोरी नस्लों के बीच शादियां ग़ैर क़ानूनी थीं. ये पाबंदी 1985 में हटाई गई.
इस अल्पसंख्यक सफ़ेद नस्ल वाले शासन से देश को 1994 में आज़ादी मिली जिसके बाद अंतरजातीय शादियां होने लगीं, लेकिन ऐसी शादियों की संख्या बहुत कम है.
इस माहौल में 14 साल पहले ईलेन और सीमो के बीच प्यार हो जाना और इसके दो साल बाद शादी करना आसान नहीं था.
लंबे समय से दक्षिण अफ़्रीका में रहने वाले भारतीय आज भी अपनी संस्कृति से जुड़े हैं. यहाँ क्षेत्र, मज़हब, जाति और गोत्र देख कर शादी करने का रिवाज अब भी है. ऐसे में भारतीय समाज से बाहर शादी करना समाज से विद्रोह करने जैसा है.
और अगर किसी काली नस्ल के लड़के या लड़की से प्यार हो जाए और मामला शादी तक पहुँच जाए तो ये बग़ावत से भी बढ़ कर है. दक्षिण अफ्रीका में काली नस्ल से शादी करना एक कलंक समझा जाता है.
दक्षिण अफ़्रीका में भारतीय मूल के लोगों की पहली खेप 1860 में आई थी. वो बंधुआ मज़दूर थे. पढ़े-लिखे नहीं थे और अक्सर वो गाँवों से ताल्लुक रखते थे. अगले 50 सालों तक इस देश में वो बंधुआ मज़दूर की तरह आते रहे.
डरबन भारतीय शहरों के बाहर एक ऐसा शहर है, जहाँ प्रवासी भारतीयों की सबसे बड़ी संख्या आबाद है. एक अंदाज़े के मुताबिक़ इस शहर में उनकी आबादी 10 लाख से अधिक है. यहाँ प्रवासी भारतीयों की खूब चलती है.
अब वो आर्थिक रूप से एक कामयाब समाज है. लेकिन काली नस्ल के लोग भारतीय मूल को उनके ख़िलाफ़ नस्ली भेदभाव करने का इल्ज़ाम अक्सर लगाते हैं. इन दोनों समुदायों के बीच शादियां तो दूर, आपसी मेल मिलाप भी कम है.
इस पसमंज़र में ईलेन का सीमो की शादी को देखा जाए तो ये एक साहसी क़दम नज़र आएगा.
शारीरिक रूप से स्वास्थ सीमो एक शर्मीले व्यक्ति हैं, जो उनकी शख्सियत को आकर्षक बनाती है. उनकी ज़ोरदार हंसी की गूँज दूर तक सुनाई देती है. वो अपनी भावनाओं का इज़हार कम शब्दों में करते हैं.
इसकी कमी ईलेन पूरी करती हैं, जो बोलने में तेज़-तर्रार और अच्छे मिज़ाज की हैं. सबसे बड़ी बात ये कि दोनों में एक-दूसरे के लिए प्यार अब भी घनिष्ठ नज़र आता है.
ईलेन और सीमो के बीच प्यार का हाल ये है कि इनमें से एक बोलना शुरू करता है तो दूसरा वाक्य को पूरा करता है. ईलेन ने कहना शुरू किया कि दो साल की डेटिंग के बाद 12 साल पहले शादी की तो झट से सीमो बोले "और हम आज भी खुश हैं"
दक्षिण अफ़्रीक़ा में ऐसी मिली-जुली नस्ल वाली जोड़ियां आज भी कम नज़र आती हैं.
ईलेन कहती हैं कि शुरू में उन्हें काफ़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था. "मेरी माँ थोड़ा डरी हुई थीं और मेरे लिए चिंतित थीं. भारतीय मूल का समाज सीमो से शादी के बिल्कुल ख़िलाफ़ था. "कई भारतीय मूल के लोगों ने इसका विरोध किया. वो मुझसे ये सवाल कर रहे थे कि मैं एक काले व्यक्ति के साथ क्यों हूँ, मैं किसी भारतीय के साथ क्यों नहीं हूँ."
भारतीय मूल के लोग 19वीं शताब्दी में आये थे तो उस समय भारत और दक्षिण अफ़्रीका, दोनों मुल्कों में अंग्रेज़ों की सरकार थी.
सरकार को दक्षिण अफ़्रीका में रेल की पटरियां बिछवानी थीं, जिसके लिए उन्हें हज़ारों की संख्या में मज़दूरों की ज़रूरत थी. इसके अलावा गन्ने के खेतों में काम करने के लिए भी मज़दूरों की ज़रूरत थी. भारत से आए अधिकतर लोग कभी वापस अपने देश को नहीं लौटे और यहीं के हो कर रह गए.
अपनी कड़ी मेहनत के कारण भारतीय मूल के लोग आज आर्थिक रूप से काफ़ी कामयाब हैं. वो कुल आबादी का केवल ढाई प्रतिशत हैं, लेकिन हर छेत्र में आगे हैं. काली नस्ल के लोगों की शिकायत है कि प्रवासी भारतीय उनके साथ नस्ली भेदभाव करते हैं. उनके अनुसार भारतीय समाज के युवाओं को काली नसल के लोगों से शादी करने से मना किया जाता था और अब भी हालात बदले नहीं हैं.
इसलिए जब ईलेन को सीमो से प्रेम हुआ तो वो चिंतित थीं कि अपने परिवार को सीमो के बारे में कैसे बताएं. सीमो के परिवार में भारतीय मूल की लड़की कोई मुद्दा नहीं था. ईलेन को सीमो के परिवार ने तुरंत अपना लिया था. ईलेन के परिवार ने संकोच किया. रिश्तेदारों ने सीमो का विरोध तक किया था.
सीमो इस विरोध से हिम्मत नहीं हारे. लेकिन नस्ली भेदभाव के साथ-साथ समस्या ये भी थी कि उस समय दोनों बेरोज़गार थे. सीमो कहते हैं कि उन्हें अपने गाँव जाकर रहना पड़ा. "हमने अपने गाँव में एक टेंट गाड़ा और अपनी पत्नी के साथ रहने लगा."
ईलेन और सीमो तब तक माता पिता भी बन चुके थे. सीमो गर्व के साथ कहते हैं, "इन कठिनाइयों के कारण हम एक-दूसरे से और भी क़रीब आए."
जब ईलेन के परिवार और रिश्तेदारों का विरोध ख़त्म हुआ तो सांस्कृतिक मतभेद सामने आए. ईलेन के अनुसार सीमो की माँ को इस बात की चिंता थी कि वो ज़ुलु संस्कृति को अपना सकेंगी या नहीं.
"हम ने ज़ुलु भाषा सीखी और उनकी संस्कृति और रीति-रिवाज के बारे में जानकारी हासिल की और इसे अपनाया. सीमो की माँ बहुत खुश हुईं. मैं काफ़ी उत्साहित थी."
ईलेन ईसाई हैं, लेकिन उनका परिवार हिन्दू है. उनके पूर्वज आंध्रप्रदेश से आए थे और इसलिए ईलेन थोड़ा बहुत तेलुगू भी बोल लेती हैं. हिन्दू प्रार्थना सभाएं उनकी संस्कृति का अब भी एक अटूट हिस्सा हैं.
उनका परिवार भजन का अक्सर आयोजन करता है. सीमो ने इसमें शामिल होने में पहल की. "मैंने भजन और भजन ग्रुप्स के बारे में काफी सुन रखा था. मैं इन में शामिल होने लगा और कई भजन सीखे."
ईलेन के अनुसार सीमो ने भजन को बहुत ख़ूबी से अपनाया. लेकिन सीमो को भजन से भी अधिक बॉलीवुड ने प्रभावित किया. ईलेन ने जब 'कुछ कुछ होता है' गुनगुनाना शुरू किया तो वो थोड़ा शर्माकर पत्नी का साथ देने लगे.
अब तो बॉलीवुड के वो इतने दीवाने हो गए हैं कि अपनी पत्नी को नई फ़िल्मों और गानों के बारे में बताते हैं. दूसरी तरफ़ ईलेन ने भी कुछ ज़ुलु गाने सीख लिए हैं.
दोनों का प्यार अब भी घनिष्ठ है, जो उनके शारीरिक हाव-भाव से साफ़ नज़र आता है. उनकी बातों से भी उनका आपसी प्यार झलकता है. वो अपनी बीवी के प्यार में कहते हैं कि वो 60 प्रतिशत भारतीय हो चुके हैं. उनके तुरंत बाद पत्नी कहती हैं कि वो 60 प्रतिशत ज़ुलु हो चुकी हैं.
उन्होंने अपने बच्चों को भी दोनों संस्कृति के रीति-रिवाज के बारे में बताया है. उनके दो बेटे और एक बेटी अभी कच्ची उम्र के हैं, लेकिन उन्हें अपने माता-पिता के नस्ली बैकग्राउंड के बारे में सब कुछ पता है.
ईलेन चाहती हैं कि लोग उनकी और उनके पति की जाति और नस्ल को न देखें. उनका विश्वास है कि "रिश्तों में जो मायने रखता है वो है प्यार."

Friday, September 14, 2018

环境成为“中国人生活中最不满意的一部分”

新华社》周一报道说,一份由《小康》杂志开展的年度观点调查发现,环境状况已连续三年成为中国人生活中最不满意的一部分。 《小康》杂志对关系中国百姓生活的全面小康11个关键词进行独立的监测和评估,并就相应的11个小康指数进行了调查,其中环境指数得分最低。

报道称,被调查的11个指数为:休闲指数、饮食指数、公共服务指数、居住指数、生命指数、生态指数、教育指数、消费指数、平安指数、信用指数和快乐指数,其中快乐指数得分最高。

报道引据《小康》杂志的编辑郭芳说:“受调查者对环境不满意的主要原因是环境污染事件的频繁出现以及环境意识的提高。”新华社》周五引据一项开展中的调查报道说,中国西部高海拔的冰川规模在过去五年中由于全球暖化而缩减的幅度高达18%。 《新华社》报道说,该现象在中国西部新疆省和西藏部分地区尤为明显。

报道引据中国科学院研究人员丁永建说:“冰川规模的变化实际上是全球暖化给中国环境施压的突出表现。”

报道还补充说:“在过去几十年间,全球暖化已导致中国西部平均气温有所上升。”
《布里斯班时报》引据最新科学研究报道说,世界上最大规模的珊瑚礁体系在气温上升、空气中二氧化碳浓度增加的环境中将难以生存。
报道称,这项由世界银行资助的研究将在《科学》杂志上发表,这是对地球珊瑚礁最权威的研究之一。据称,该研究显示,珊瑚礁的未来比预期的更令人堪忧。

海洋吸收了释放到大气中的30%的二氧化碳,这个过程将缓慢地改变各大洋的酸碱度。

做为世界上最大规模的珊瑚礁体系的大堡礁位于澳大利亚东北海域。路透社》周五报道说,一为推动未来两年全球气候变化谈判而草拟的妥协性协定删除了针对富国而制订的2020年雄伟减排目标。 联合国巴厘岛气候变化会议的最后一轮谈判中,美国与欧盟就该草案的内容产生分歧。欧盟希望工业化国家同意在2020年前将温室气体的排放水平在1990年的基础上降低25%至40%。

《路透社》报道说,目前尚不清楚是否欧盟、美国和其他国家将同意签署这份由东道国印度尼西亚起草的草案。

该草案保留了全球温室气体排放在未来10到15年间达到最高水平的提法和在2050年前将排量降为2000年水平的一半的雄伟目标。该草案忽略了美国的各国应仅实现国内减排目标的提议。中国青年报 》周四报道,4000多家企业因曾经或者正在损害空气质量的事实,被“公众与环境研究中心”这家民间组织收集在他们刚刚完成的“中国空气污染地图”上。 《中国青年报 》报道说,“中国空气污染地图”网站的名单上包括了中石化、海螺等大公司在中国各地的分支机构,也有APP、巴斯夫、米其林等知名跨国公司在中国的分公司。

“地图”的制作者、“公众与环境研究中心”的负责人马军说:“该数据库收集了自2004年以来的污染源信息。”

他补充道,这些污染企业的信息一方面来自环保系统或各级政府部门公布的污染企业情况,另一方面来自媒体对政府信息的报道。

马军希望该数据库能给污染企业施压并敦促它们治理污染,同时也鼓励大众对企业的污染信息进行监督。
参与巴厘国际气候变化会议的中国代表团团长解振华说,不管大会结果如何,中国都会坚持节能减排,这是中国国内社会经济发展的内在要求,“中外对话”记者易水报道。
中国国家发展和改革委员会副主任解振华说,为帮助中国国民接受环保的生活方式,中国政府制定了节能减排生活指导手册。他说,如果全国每人每天用一小时来做一点手册中建议的小事,每年就能节约2亿吨标准煤的能源消耗,约相当于减少4.5亿吨的碳排放。

解振华说,发展中国家最关心的技术转让谈判看起来不顺利。但事实上这次巴厘岛谈判还是很有进展,现在的障碍只是出在小的枝节问题上。

谈到中国的核能发展, 他指出,中国会坚持积极发展核能这一清洁能源,争取2020年达到4千万千瓦。

Thursday, September 6, 2018

比利时城市设立素食星期四

据英国《卫报》报道,从本周开始,为了对抗气候变化、肥胖以及动物虐待,比利时城市根特将每周四定为“素食日”。当地市议会称,根特是全欧洲(或许是整个西方世界)第一个每周定期素食的城市。

推动此项方案的议员汤姆巴萨泽对记者说“素食日活动并不是强制性的,我们只是想成为一个倡导可持续的健康生活方式的城市”。根特的餐厅向来以鱼类和贝类食品闻名,但是现在他们都保证菜单上会有素食,而一些餐厅在周四将全部供应素食。从9月开始,学校也会在周四将素食定为“首选”,当然家长还是可以坚持让孩子吃一些肉食。

《卫报》称,自中世纪开始繁荣的根特市,想让人们意识到密集制造的肉类和奶制品业对人类健康和环境的影响。其他城市或许会效仿根特,比如加拿大的某城镇,比利时和荷兰的一些城市开始对根特的这一计划进行咨询。

该计划的组织者援引联合国的数据称,在造成气候变化的温室气体中,18%来自肉制品的生产和消费。一位素食宠物食物的进口商 告诉记者说:“这个计划并不是强迫每个人都成为素食主义者,但是它能减少我们的碳足迹,而最基本的前提就是引进一种方法来减少我们的肉食消费。”
据英国《卫报》报道,英国广播公司获得的一份文件第一次详细披露了英国石油交易商将具有潜在致命性的有毒废料倾倒在非洲西部最贫穷的国家之一象牙海岸的事实。荷兰对2006年装载在特许船舶普罗伯考拉上的废物进行了正式的样本分析,结果显示其中含有约为两吨的有毒物硫化氢。

废物从阿比让港转移到卡车,再运到城周场所,然后倾倒播散。超过3万人认为他们受到这种具有典型臭鸡蛋气味的污泥混合物的影响。他们目前都参与到针对这家名为托克国际( )的公司的法律行动中。这是英国有史以来最大规模的集体诉讼,案件定于10月开审。

该公司最初在2006年发表声明,否认油轮载有有毒废物。相反,他们声称该船所载的为清洗船舱的常规“污水”。托克国际的律师于星期三对《卫报》记者说:“我们不打算陷入对“污水”化学成分的细节争辩中 。”

这些律师告诉记者,此类问题将在高等法院进行审判裁决,托克国际的立场是“污水没有也不可能造成如被指控所言的人员死亡(至少十人)及疾病传播” 。

在漫长而激烈的诉讼过程中,托克国际已表示,只要来自象牙海岸的任何人能证明有毒废物确实是他们生病的缘由,公司愿意支付赔偿。受害方的律师则争论废物中含有致命的混合成分,其中包括具有高度腐蚀性的苛性钠。路透社援引中国发改委一位官员的发言称,中国呼吁发达国家签署在2020年前将二氧化碳减排量由原先的25%提高至40% 。这位名为李丽燕的官员称,作为全球温室气体排放量最大的国家,中国想要致力于减少某些行业的气体排放,但是目前为止还没有制定出具体实施计划。
中国发改委是中国首席经济计划部门,其应对气候变化司副司长李丽燕告诉记者:“哥本哈根会议的成功需要发达国家更大幅度的减排和更积极的目标”。来自200多个国家的代表将出席12月于丹麦首都哥本哈根举行的全球气候变化会议,共同探讨并制定出范围更广泛的气候变化协定,以取代即将于2012年到期的第一阶段《京都议定书》。

发展中国家希望发达国家签署比《京都议定书》上更高的减排协议,同时希望富裕国家能够给他们提供更多的资金帮助他们适应气候变化,并支付能使他们转向低碳经济的清洁能源技术。

李丽燕说,对于联合国清洁发展机制的任何改革,中国都承诺“分业种减排”。这意味着中国各个行业将共同参与,协作减少温室气体排放。当路透社问道这是否代表着中国将对特定行业制定具体的减排目标时, 李回答说:“我们希望能做到这点,但是现在我们还没有具体的实施办法。”

Monday, September 3, 2018

हार्दिक पटेल के बहाने समझिए क्यों बनवानी चाहिए वसीयत

गुजरात में कुछ दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने अपनी वसीयत या विल जारी की है. क्या होती है वसीयत और क्यों नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता इसे?
क्या आपके किसी बैंक खाते में थोड़े या ज़्यादा पैसे जमा हैं? क्या आपके नाम पर कोई घर, दुकान या ज़मीन का टुकड़ा है? क्या आपके पास सोने के आभूषण, हीरे-जवाहरात या बेशक़ीमती चीज़ें हैं?
सरल शब्दों में अगर आपके पास चल या अचल संपत्ति है तो ये लेख आपके लिए है क्योंकि आपके जीवित रहते ये तय हो जाना चाहिए कि मृत्यु के बाद आपकी इन चीज़ों का क्या होगा.
और इसीलिए आपकी वसीयत होनी बेहद ज़रूरी है. तो क्या होती है वसीयत और इसे कैसे बना और बदल सकते हैं आप?
वसीयत या विल एक ऐसा ज़रूरी क़ानूनी दस्तावेज़ होता है जिसमें इसे बनाने वाला ये तय करता है कि उसकी मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति का क्या होना है.
इस दस्तावेज़ को तैयार करने वाला जीवित रहते हुए अपनी वसीयत को कभी भी निरस्त कर सकता है या इसमें बदलाव कर सकता है.
वसीयत की क़ानूनी वैधता पक्की करने के लिए ये ज़रूरी है कि इसका कार्यान्वयन ठीक से किया गया हो.
वरिष्ठ वकील गौरव कुमार के मुताबिक़, "इसका सबसे बड़ा मक़सद ये है कि पारिवारिक झगड़े न हों. दूसरी सबसे अहम बात ये है कि वसीयत तभी से लागू होगी जब उसे बनाने वाले की मृत्यु हो जाएगी."
साथ ही अगर कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति अपने प्राकृतिक वारिसों के अलावा भी किसी व्यक्ति या संस्था या दूसरे परिवार को देना चाहे तब भी वसीयत सबसे बेहतर क़ानूनी तरीका है.
अगर आपको पुश्तैनी जायदाद पर बिना किसी शर्त के मालिकाना हक़ मिला है तो वसीयत के ज़रिए आप उसे किसी को दे सकते हैं.
ऐसा हर कोई व्यक्ति जो मानसिक रूप से स्वस्थ है, अपने होशो-हवास में वसीयत बनवा सकता है.
क़ानून ऐसे लोगों को भी वसीयत बनाने की इजाज़त देता है जो देख-सुन नहीं सकते, लेकिन अपने फ़ैसलों को पूरी तरह समझ सकते हैं.
क़ानून ऐसे किसी भी व्यक्ति की वसीयत पर सवाल उठा सकता है जिसकी वसीयत तब तैयार की गई हो जब वो मानसिक तौर पर बीमार रहा/रही हो.
वसीयत किसी सादे कागज़ पर भी बनाई जा सकती है और किसी स्टैंप पेपर पर भी.
हालांकि वसीयत बनाने वाले के हस्ताक्षर या निशान इसी कागज़ पर होना अनिवार्य है.
अगर वसीयतकर्ता ये करने में सक्षम नहीं है तो वो अपनी उपस्थिति में किसी दूसरे व्यक्ति को इसे कार्यान्वित (एक्ज़ीक्यूट) करने का अधिकार दे सकता है.
वसीयत बनाने वाले के हस्ताक्षर होने के बाद इस वसीयत को दो या दो से ज़्यादा गवाहों से सत्यापति किया जाना चाहिए.
वसीयत का गवाह होने के लिए 18 वर्ष से अधिक आयु होना अनिवार्य है.
सुप्रीम कोर्ट की वकील रेखा अग्रवाल के अनुसार, "अगर कोई व्यक्ति आपकी वसीयत के बाहर का है, यानी उसका नाम वसीयत में कहीं शुमार नहीं है, तो वो सबसे बेहतर और मज़बूत स्थिति होती है जिससे बाद में मतभेद न हो". sex
वसीयत बनाने के बाद क्या
वसीयत बनाने के बाद आप उसे ख़ुद अपनी हिफ़ाज़त में रख सकते हैं या फिर अपने वकील या रिश्तेदार के पास रखवा सकते हैं.
भारतीय पंजीकरण अधिनयम के तहत आप अपनी वसीयत की सुरक्षा के लिए उसे किसी भी रजिस्ट्रार के पास भी जमा करवा सकते हैं.
अपनी वसीयत बनाने के कुछ समय बाद अगर आप उसमें कुछ जोड़ना या हटाना चाहते हैं तो ये बहुत आसानी से हो सकता है.
आपको अपनी मौजूदा वसीयत को निरस्त करना होगा और एक नई वसीयत या विल तैयार करनी होगी.